कांडी: सतबहिनी झरना तीर्थ पहुंचे झारखण्ड राज्य हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड के सदस्य ने दोनों पक्षों से की बात,वस्तु स्थिति का लिया जायजा 

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साकेत मिश्र

कांडी : प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत सतबहिनी झरना तीर्थ व पर्यटन स्थल के प्रांगण में बुधवार को रांची से चलकर आए झारखण्ड राज्य हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड के सदस्य संजीव कुमार तिवारी, विजय कुमार दुबे व राम नगीना पांडेय पहुंचे। सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल स्थित हनुमान मंदिर के प्रांगण में उपस्थित सैकड़ों लोगों से पूछताछ की गई। पूछताछ में घटहुआँ कला पँचायत के पूर्व मुखिया नंदलाल साह, पूर्व उप मुखिया अजीज अंसारी, बाल मुकुंद साह, राजेश कुमार दुबे उर्फ मक्खन दुबे, सुरेंद्र तिवारी, ललित दुबे, रामजन्म पांडेय, संत हरिदास, बैजनाथ पांडेय, बुधन यादव, अतीस सिंह, सहित अन्य लोगों से भी पूछताछ की गई। जबकि फोन के माध्यम से अरुणोदय कुमार सिंह उर्फ अरुण सिंह से भी पूछताछ की गई। उक्त सभी लोगों ने बताया कि हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड के तहत दिखाया गया आयोजित आमसभा व आमसभा में किए गए सदस्यों का हस्ताक्षर फर्जी है। वहीं पूर्व समिति के कई सदस्यों ने बताया कि क्षेत्र के प्रत्येक गांव से एक-एक लोगों से एक एक रुपया चंदा इक्कट्ठा करके सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल को विकसित किया गया है।

वहीं जांच पदाधिकारी द्वारा ट्रस्ट के वर्तमान सदस्य रामलला दुबे, ललित बैठा व अन्य को खोजा गया तो मौके पर उपस्थित नहीं थे।

वहीं पूर्व विकास समिति अध्यक्ष नरेश प्रसाद सिंह ने कहा कि 2001 से 2004 तक सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल विकास समिति के अध्यक्ष प्रियरंजन सिन्हा थे। मैं2004 में वर्ष के मध्य से मैं अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला। सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल के विकास के लिए तीन प्रकार के सदस्य बनाए गए। विशिष्ट स्थायी सदस्य, स्थायी सदस्य व सामान्य सदस्य। विशिष्ट स्थायी सदस्य 1100, स्थायी सदस्य 500 व सामान्य सदस्य इससे कम सहयोग राशि प्रत्येक वर्ष देकर यहां की विकास में अपनी भागीदारी निभाई। 2017 तक इस स्थल पर लोगों की सहयोग से 09 मंदिर, पक्का यज्ञ शाला, 02 प्रवचन मंच, मुख्य गेट, सीढ़ी व पार पथ पुल का निर्माण पूर्व कमिटी के द्वारा किया गया है। सूचना अधिकार के तहत कागजात निकालने के बाद पता चला कि गठित ट्रस्ट में मुझे भी सदस्य बनाया गया है। जबकि मैं अभी तक एक भी ट्रस्ट की बैठक में उपस्थित नहीं हुआ हूँ। मैं जांच अधिकारी से आग्रह करता हूँ कि जनमानस की भावनाओं की आदर करते हुए लोगों को न्याय दें।

जबकि पूर्व कमिटी के सचिव मुरलीधर मिश्र ने जांच पदाधिकारी के समक्ष कहा कि माननीय विधायक ने 2017 में हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड के समक्ष कागजात प्रस्तुत किए थे कि सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल की स्थिति जीर्ण शीर्ण अवस्था मे है। जबकि अयोध्या से पधारे महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 प्रेम शंकर दास जी ने नवनिर्मित मंदिरों का शिलान्यास 2016 में किया था। शिलापट अभी भी शिव मंदिर के बगल में लगा हुआ है।

वहीं झारखण्ड राज्य हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड के सदस्य सह जांच पदाधिकारी संजीव कुमार तिवारी ने सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल के वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष अजय कुमार सिंह से भी पूछताछ की। उन्होंने भी जांच पदाधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखा।

 

जांच पदाधिकारी संजीव कुमार तिवारी ने सैकड़ों ग्रामीणों के बीच मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस स्थल पर लगे जंग को साफ करना है। बहुत से लोगों के ब्यान सुनने के बाद प्रतीत हो रहा है कि गलत तरीके से ट्रस्ट के गठन किया गया है। आप सभी ग्रामीण निश्चिंत रहें। आपको न्याय मिलेगी। इस स्थल के विकास में सभी धर्मों के लोग शामिल हैं। सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल एक मिसाल है। कुछ लोगों के चलते यह स्थल बदनाम हो रहा है, लेकिन जो भी संलिप्त होंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। जांच अधिकारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ट्रस्ट के उपस्थित लोगों से आय-व्यय का लेखा-जोखा की मांग की गई, जो नहीं मिल सका। कहा जा रहा है कि अध्यक्ष जी रांची लेकर चले गए हैं। मंदिर का चीज मंदिर में होना चाहिए, न कि किसी के घर में। उन्होंने कहा कि जांच के बाद जांच रिपोर्ट माननीय न्यायालय को सौंपा जाएगा।

 

मौके पर प्रदेश प्रमुख संघ अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार पांडेय उर्फ पिंकू पांडेय, बीस सूत्री अध्यक्ष चंद्रशेखर उपाध्याय उर्फ विकास उपाध्याय, विनोद ओझा, हरिनाथ चन्द्रवंशी, विनोद चन्द्रवंशी, गोरखनाथ सिंह, सुदर्शन तिवारी, रमेश तिवारी, सरयू राम, यश कुमार पांडेय, नंदलाल दुबे, हसन राम, ध्रुव कुमार पांडेय, दिलीप पांडेय, अवधेश गुप्ता, बलराम साह सहित बहुत लोग उपस्थित थे।


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