गढ़वा: डीसी रमेश घोलप ने किया प्रेस कॉन्फ्रेंस

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अतुलधर दुबे

गढ़वा। डीसी रमेश घोलप की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित सभाकक्ष में सुखाड़ को लेकर सूखा राहत एवं स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। उक्त बैठक में अपर समाहर्ता पंकज कुमार सिंह, सिविल सर्जन डॉ कमलेश कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी रामाश्रय राम, एनआईसी पदाधिकारी दिनेश कुमार रजक तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधिगण उपस्थित थें। कृषि विभाग अंतर्गत सूखा राहत राशि के विषय के बारे में चर्चा करते हुए उपायुक्त श्री घोलप द्वारा वर्तमान वर्षा ऋतु के दौरान जिले में हुए कम बारिश एवं फसलों के रोपाई तथा जिले में बीज की उपलब्धता आदि के बारे में बताया गया। पिछले वर्षों में हुए वर्षा की तुलना में वर्तमान वर्षापात प्रतिवेदन बताते हुए कहा कि गढ़वा जिले में वर्षापात का प्रतिशत सामान्य से भी कम रहा है। खरीफ फसलों के आच्छादन प्रतिवेदन के तहत अभी तक जिले में 5. 22% ही धान की रोपाई हो पाई है, जबकि जबकि मक्के की रोपाई 71.93% ही हो पाई है। दलहन एवं तिलहन फसलों के बीज की उपलब्धता की जानकारी दी गई। सूखे से राहत पाने हेतु उपायुक्त श्री गुलाब द्वारा बताया गया कि झारखंड राज्य फसल राहत योजना के तहत 30% से 50% तक हुए नुकसान के लिए ₹3000 प्रति एकड़ की दर से कुल 5 एकड़ के लिए राहत राशि प्रदान की जाएगी जबकि 50% से अधिक सुखाड़ की स्थिति होने पर ₹4000 प्रति एकड़ की दर से कुल 5 एकड़ तक के लिए राहत राशि उपलब्ध कराई जाएगी। बैठक के दौरान बताया गया कि इस योजना का लाभ लेने हेतु एक किसान को संबंधित पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। जिला अंतर्गत अभी तक कुल 122746 किसानों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत कुल 250942 किसानों का लक्ष्य रखा गया है जिसमें 152608 लोगों ने अपना लैंड पोजिशनिंग से संबंधित रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड कर दिया है जिसकी प्रतिशत 60.81% है। इस योजना के लाभ लेने से संबंधित किसानों का ई-केवाईसी जिले में 52% तक हो चुकी है। उपायुक्त श्री घोलप द्वारा बताया गया कि योजना का लाभ लेने के लिए जब तक लैंड रिकॉर्ड पोर्टल पर किसानों के द्वारा अपलोड नहीं किया जाएगा तब तक उनकी अगली किस्त का भुगतान नहीं किया जाएगा। इसके पश्चात स्वास्थ्य संबंधी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उपायुक्त श्री घोलप द्वारा बताया गया कि क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के तहत अब तक किए गए कार्यवाही के पश्चात जिले के पंजीकृत अस्पतालों में सुधार आई है। उन्होंने बताया कि जिले में आए दिन विभिन्न स्रोतों से सूचना के आलोक में अयोग्य व्यक्ति द्वारा चिकित्सकीय कार्य एवं क्लीनिक का संचालन करने वाले संस्थानों एवं चिकित्सकों पर अंकुश लगाने का कार्य किया गया है तथा आम जनता को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उदेश्य से स्वास्थ्य विभाग के अस्पताल पर औचक निरीक्षण का कार्य किया गया है। उक्त के आलोक में बताया गया कि जिले में पूर्व से पंजीकृत अस्पतालों की संख्या कुल 117 है जिसमें अभी तक चिकित्सकीय मापदंड पर खरा नहीं उतरने वाले कुल 37 अस्पतालों ने प्रशासन के समक्ष सरेंडर करने का कार्य किया है। वर्तमान समय में अभी कुल 80 निजी अस्पताल संचालित है। चिकित्सक द्वारा अवैध रूप से पंजीयन प्राप्त कर कार्य करने वाले व्यक्तियों के अंदर प्रशासन की कार्यवाही से भय व्याप्त है। वर्तमान में नए तथा पुराने क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट 2010 हेतु प्राप्त आवेदन पर चेकलिस्ट के अनुसार जांच पड़ताल के उपरांत योग्य चिकित्सक के सहमति के पश्चात ही पंजीयन की कार्रवाई की जा रही है। भविष्य में गैर चिकित्सकों द्वारा अवैध रूप से चिकित्सकीय कार्य ना हो इसके लिए समय-समय पर कमेटी द्वारा अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। जिले में निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर आदि की वास्तविक स्थिति एवं प्रतिवेदन के लिए प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से तिथि निर्धारित कर बैठक आयोजित की जाएगी। तदोपरांत वास्तविक सूची तैयार कर निजी अस्पतालों पर निगरानी रखी जाएगी। जिले में संस्थागत प्रसव में सरकारी अस्पतालों में लगभग 10% की बढ़ोतरी हुई है तथा मरीज को सरकारी अस्पताल से रेफर करने में लगभग 10% की कमी आई है। उपायुक्त ने प्रेस प्रतिनिधियों के माध्यम से अपील की है कि संस्थागत सरकारी अस्पतालों में ही अपने इलाज करावे जिसमें सभी सुविधाएं मुहैय्या कराने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि संस्थागत सरकारी अस्पतालों में लगातार सुधार के कार्य किए जा रहे हैं जिसके कारण हाल के कुछ दिनों में अधिकाधिक मरीजों का इलाज या प्रसव संबंधी कार्य किए गए हैं। उक्त बैठक में उपरोक्त पदाधिकारियों के अतिरिक्त समाहरणालय एवं सभी संबंधित विभागों के अन्य कर्मी भी उपस्थित थें


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